सोयाबीन की खेती


सोयाबीन की खेती

सोयाबीन-की-खेती

आज के इस ब्लॉग मे सोयाबीन की खेती के बारे मे विस्तार से जानकारी देंगे जिसमे हम सोयाबीन का वानस्पतिक जानकारी तथा म्रदा, बीज ,सिंचाई, खरपतवार, रोग, किट, उपज आदि के बारे मे बतायेंगे

तो चलिये दोस्तो इस ब्लॉग को शुरू करते है

सोयाबीन की खेती की सामान्य जानकारी

  • सोयाबीन का कुल लेगुमिनोसी है
  • इस फसल की उत्पत्ति चीन मे हूई
  • इसका वानस्पतिक नाम ग्लाईसीन मैक्स है
  • सोयाबीन का वानस्पतिक तेल मे पहला स्थान पर है
  • सोयाबीन की फसल दलहन ओर तिलहन दोनों प्रकार की है
  • सोयाबीन मे 40% प्रोटीन 20% तेल पाया जाता है
  • सोयाबीन मे अधिक प्रोटीन होने के कारण इस फसल को शाकहारियों के लिए मांस के रूप मे जानते है
  • सोयाबीन की फसल एक स्व-परागित फसल है 
  • विश्व मे सोयाबीन का अत्यधिक उत्पादन usa करता है जो की दुनिया मे प्रथम स्थान रखता है 
  • भारत मे सोयाबीन उत्पादन का प्रथम स्थान मध्यपरदेश का है,दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र तथा तीसरे स्थान पर राजस्थान है


मिट्टी का चुनाव-


सोयाबीन की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है परन्तु इसकी खेती सभी प्रकार की मिट्टी मे की जा सकती है जिस भूमि मे पानी का जमाव होता हो तो वह सोयाबीन की खेती नही करना चाहीये


बीजदर व बीज उपचार-


बड़े दाने वाली सोयाबीन की बीजदर- 100kg प्रति हैक्टयर


मध्यम दाने वाली सोयाबीन की बीजदर- 80kg प्रति हैक्टयर


छोटे दाने वाली सोयाबीन की बीजदर- 60-70kg प्रति हैक्टयर


बीज उपचार- FIR विधि से करते है


F- बाविस्टीन या ट्राइकोड्रमा

I- क्लोरोपाइरीफास सफ़ेद लट के लिए

R- राइजोबियम कल्चर से


बुवाई का समय-


15 जून से 15 जुलाई का उपयुक्त समय होता है


कतार से कतार की दूरी 30cm बोनी किस्म ओर बड़ी किस्म मे 45cm होना चाहिए


किस्मे(Varietes)-


गुच्छेदार सोयाबीन की किस्मे-


JL-24 90 दिन मे तैयार हो जाती है


GG-2 इस किस्म मे तेल की मात्रा 48% होती है 


AK-12-24, RG-141, RG-382, T-32, TMV-7-9

ज्योति, कौशल, फेजापुर-1


फेलने वाली सोयाबीन की किस्मे-


RS-1, RSB-87, M-13, 

अम्बर, गिरनार, जीजी-20


सिचाई(Irrigation)-


सोयाबीन की फसल खरीफ मे बोयी जाती है जिसके कारण सिचाई की जरूरत नही पड़ती है


फलिया मे दाना बनते समय नमी पर्याप्त नही हो तो सिचाई कर देना चाहिए


खरपतवार(Weed)-


फसलों की बुवाई के 30-40 दिनों मे खरपतवारों की समस्या अधिक होती है इसके नियंत्रण के लिए देशी कलफ़ चलाकर खरपतवार साफ करे या अंकुरण से पहले एलाक्लोर(लासो) का @1.5kg प्रति हक्टेयर उपयोग करे


15-20 दिन की फसल मे खरपतवारों को नष्ट करने के लिए क्यूजेलोफोन इथाइल 1 लिटर प्रति हक्टेयर उपयोग मे ले ओर चोड़ी पत्ती वाले खरपतवार की भी समस्या हो तो इमेजोंथाफायर 750ml प्रति हेक्टयर छिड़काव की सलाह दी जाती है


रोग(Disease)-


चारकोल रोट- इस रोग की रोकथाम के लिए बीज उपचार कार्बेण्डजिम 2-3g प्रति 1 किलोग्राम बीज


पीलिया रोग- यह रोग जिंक की कमी से होता है इस रोग की रोकथाम FeSO4 का 0.5% का छिड़काव करे


Yellow Mosaic- यह रोग वाइरस से फेलता है इसकी रोकथाम के लिए Dimethoate @ 2-3एमएल/लिटर पानी के साथ प्रयोग करे


किट(Insect)-


गर्डल बीटल- यह किट फलियो मे छेद कर बीजो को खाता है इसकी रोकथाम के लिए Dimethoate @ 2-3एमएल/लिटर पानी के साथ प्रयोग करे


राजस्थान मे टोबेको केटर पिल्लर किट 2001 मे सोयाबीन की फसल मे महामारी के रूप मे फेला था


फसल की कटाई-


पोधे की पत्तिया सूखने ओर 10% फलियो के सूखने पर फसल की कटाई कर लेना चाहिए कटाई के बाद 2-3 दिन  फसलों को सुखाना चाहिए इसके बाद थ्रेशर के निकाल लेते है


उपज(Yield)-


सिंचित क्षेत्रों मे 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टयर


असिंचित क्षेत्रों मे 10-15 क्विंटल प्रति हेक्टयर

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