मटर की खेती
हैलो दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम मटर की खेती के बारे मे बात करेंगे।
मटर की खेती क्या होती है ? मटर का उत्पादन कैसे किया जाता है । मटर की खेती कैसे करते हैं ? मटर की खेती किस मौसम में की जाती है मटर की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी की आवश्यकता होती है मटर किए कौन-कौन से क़िस्म होते हैं ? मटर की फसल में कौन से रोग व कीट होते है यह सारी बातें हम इस ब्लॉग में जानेंगे तो चलिए दोस्तों ब्लॉग को शुरू करते है
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| मटर की खेती |
मटर की खेती की सामान्य जानकारी
- मटर का वानस्पतिक नाम पाइसम सेटाइवम है
- मटर की उत्पत्ति- भारत में हुई है
- मटर की दो प्रजातियां पाई जाती है
- फिल्ड पी- पायसम सेटाइवम Variety Arvense (बीज या दाल के लिए)
- गार्डन पी- पायसम सेटाइवम variety hortance
(सब्जियां कैनिंग के लिए)
- मटर में प्रोटीन 25%, कार्बोहाइड्रेट 64% पाया जाता है
- मटर की परिपक्वता मापने के लिये Tendrometer यंत्र का उपयोग करते है
- मटर को हरी अवस्था में फलियों के रूप में सब्जी के लिए और सूखे दानों को दाल के रूप में खाया जाता है
- मटर के दानों को सुखाकर उसकी डिब्बा बंदी की जाती है ताकि मटर सुरक्षित रहे जिससे मटर को बाद में सब्जी के रूप में खाया जा सकता है
- मटर डिब्बाबंदी के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है
- देश में उत्तर प्रदेश क्षेत्र व उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है
- मटर की खेती रबी season मे कि जाती है
जलवायु-
मटर(Pea) की खेती के लिये नम व ठंडी जलवायु होन चाहिए
मटर की बुवाई करते समय अंकुरण हेतु 22 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए
अच्छी पैदावार हेतु 15 - 25 डिग्री सेल्सियस
तापमान उपयुक्त रहता है अतः मटर की बुवाई 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक कर देना
चाहिए
मटर का पौधा पाले के प्रति संवेदनशील
होता है
मृदा-
मिट्टी दोमट व रेतीली मृदा उपयुक्त है
उर्वरक-
ऊंचाई वाली किस्मों में-
नाइट्रोजन की मात्रा 20 - 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर डालते
हैं
अगर मिट्टी में फास्फोरस पोटाश की कमी हो तो ऊंचाई वाली किस्म
के लिए 40 किलोग्राम
प्रति हेक्टेयर फास्फोरस देना चाहिए
पोटाश की मात्रा 20 - 30 किलोग्राम देना चाहिए
बोनी किस्मों के लिए-
नाइट्रोजन 40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
फास्फोरस की मात्रा 40 - 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
फास्फोरस देना चाहिए
पोटाश की मात्रा 20 - 30 किलोग्राम देना चाहिए
किस्में-
मटर की किस्में का
वर्गीकरण दो प्रकार से है
गार्डन पी- पायसम सेटाइवम variety hortance
हरी सब्जी के लिए इसमें सफेद रंग के फूल
आते है तथा फलियों को हरी अवस्था में तोड़ते हैं
मिटीओर, पंत उपहार, बोनविले हिसार हरित-1, अर्केल, अजाद P-1, लिटिल मार्बल, हरा बौना, जवाहर matar-1
अर्का अजीत- पाउडरी मिलडायू के प्रति
रोग रोधी
हरभजन- सबसे जल्दी पकने वाली
सालविया (संपूर्ण फली खाने योग्य )
बीज के लिए फील्ड पीपायसम सेटाइवम Variety Arvense
लाल रंग के फूल आते हैं तथा दाने छोले
हरा चारा हरी खाद के लिए उगाई जाती है
Kism- HFP-4 भारत की पहली संकर किस्म है
DMR ,T-163,RPG-3, स्वर्णरेखा, सपना, स्वाती, हंस,रचना
बीज दर-
दाने के लिए 75 - 100 किलोग्राम पर
हेक्टेयर
अगेती एवं सब्जी के लिए 100 -120 किलोग्राम पर
हेक्टेयर
कतार से कतार व पौधे से पौधे की दूरी 30 X 10 सेंटीमीटर
अंकुर भूमिक होता है
बीज उपचार FIR विधि द्वारा
F- fungicide बाविस्टन
I- insecticide
cloropyrifaas या cunal paas
R- rhizobium- rhizobium
खरपतवार नियंत्रण-
नदीनों के नियंत्रण के लिए पैंडीमैथालीन
1 लीटर या बसालिन 1
लीटर प्रति एकड़ में डालें
रोग-
छाछाया रोग (पाउडरी मिलडायू) ईरीसाइपी
पालिगोनी कवक
नदिनों के नियंत्रण के लिए
नियंत्रण- गंधक का चूर्ण 25 किलोग्राम पर हेक्टयर
का बुरकाव या 0.5 केराथेन का छिड़काव
सूखा रोग- फ्यूजेरियम आक्सिएस्पॉरियम
कवक
नियंत्रण-
बाविस्टन 3 ग्राम पर किलोग्राम
बीज उपचारित करें
चना मक्खी
पॉड बोरर
लीफ माइनर
वैज्ञानिक तकनीकी से की गई खेती से लगभग
सूखी मटर 18-35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार प्राप्त
कर सकते हैं और हरी परियों की 90 - 150 क्विंटल प्रति
हेक्टेयर प्राप्त की जा सकती है
मटर की खेती क्या होती है ? मटर की खेती कैसे करते हैं तो दोस्तों यह ब्लॉक मैं आप लोगों को मटर की खेती के बारे में अच्छे से समझाया है अगर किसान भाइयों मटर की खेती करना चाहते हैं तो कुछ जानकारी यहां से आपको यहां से मिल सकती है दोस्तों ऐसे ही फसलों कृषि से संबंधित जानकारी के लिए इस ब्लॉग को फॉलो कर सकते हैं।


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