मक्का की खेती
मक्का की सामान्य जानकारी
मक्का का कुल ग्रेमिनी पोएसी है इसका उत्पत्ति स्थल मेक्सिको है
अनाजों में सबसे अधिक उत्पादन क्षमता के कारण अद्भुत फसल कहते हैं
इसका दाना केरियोपसिस कहलाता है और गर्म जलवायु का पौधा है
विश्व में क्षेत्रफल (क्रम अनुसार) 1 USA, 2 China, 3 Maxico और 4th नंबर पर India है
उत्पादन की दृष्टि से अमेरिका का पहला स्थान है और चीन का दूसरा स्थान है
मक्का दिवलिंगाश्रय पोधा हैं जिसमें पौधे में नर और मादा एक ही पुष्पा पर मौजूद होते हैं
मक्का साइलेज के लिए सबसे उपयुक्त है
मक्का को उनके आधार पर अलग-अलग वर्गीकृत किया गया है-
जियामेज इंडूरेटा- भारत में सर्वाधिक क्षेत्र में उगाई जाती है
जियामेज इंडेनटेटा- इसकी खेती संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रचलन में है
जियामेज सेकेरेटा-
यह डिब्बा बंदी के लिए उपयुक्त है यह दूसरों मक्का की अपेक्षा मीठी होती है
इसलिए इसके भुटटो को पकने से पूर्व सेक कर खाया जाता है
इसकी किस्में है प्रिया और माधुरी है
जियामेज इवर्टा- इसका उत्पादन पॉपकॉर्न और चिप्स बनाने के लिए किया जाता है
जियामेज एमेलेसिया- इसका दाना मुलायम होता है जो आटा बनाने काम आता है
जियामेज सेरेटिना- यह मक्के की प्राचीन के समय की किस्म है
मक्का की किस्में-
संकर किस्में-
गंगा-1 भारत की प्रथम संकर किस्में हैं जिसको 1961 में विकसित किया गया था
गंगा सफेद-2, गंगा-5, गंगा-101, ढक्कन-103, रंजीत आदी संकर किस्में है
संकुल किस्में-
अंबर, किसान, विक्रम, जवाहर, सोना, विजय, प्रताप, नवीन, तरुण संकुल किस्में है
बीज दर(seed rate)-
संकर किस्म की 25kg/hac
संकुल किस्म की 28-20kg/hac
रबी मौसम में हो तो 20-25kg/hac
चारे के लिए हो तो 40 से 50 किलोग्राम पर हैक्टेयर बुआई करना चाहिए।
बुआई(Sewing)-
अच्छी बुवाई के लिए डिबलिंग विधि से करते है
पौधे से दूसरे पौधे की दूरी यानी कतार से कतार की दूरी 62X 20 सेंटीमीटर
मक्का में जिंक की पूर्ति करने के लिए सल्फेट 25 किलोग्राम पर हेक्टेयर बुवाई से पहले फास्फोरस तथा पोटाश उर्वरक का भुरकाव करे
जलवायु(Climate)-
अच्छे अंकुरण के लिए 21 डिग्री सेल्सियस ताप जरूरी होता है अगर पौधा वृद्धि कर रहा है तो 32 डिग्री सेल्सियस तापक्रम की आवश्यकता होती है
मक्का की खेती रबी, जायद, खरीफ तीनों मौसमों में की जा सकती है
सिंचाई( Irrigation)-
इसकी जल मांग 500 से 800 एमएम होती है
प्रथम सिंचाई Tasseling आते समय करना चाहिए और दूसरी सिंचाई Silking आते समय करना चाहिए सिंचाई की क्रांतिक अवस्था टेस्लिंग व सिल्किंग होती है
खरपतवार(Weed)-
सावा, मकरा, कोंदो, बन्दरा-बंदरी, दूबघास, हजार दाना, जंगली चौलाई आदि।
नियंत्रण-
जीन का उपयोग करना चाहिए परंतु भारत में सीमा जिनका प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है तो इसकी जगह एट्राजीन शाकनाशी का प्रयोग करे।
रोग (Diseases)
डाउनी मिलडायू-
मक्का का प्रमुख रोग है
जो पेरेनोस्पोरेलेज मैडिस नामक कवक के द्वारा फैलता है
वाइट बोर्ड सफेद कली
मक्का के पौधे के ऊपरी भाग की पत्तियां सफेद हो जाती है यह जिंक की कमी के कारण होता है
इसकी रोकथाम के लिए जिंक सल्फेट 30 से 25 किलोग्राम पर हेक्टेयर बुवाई के साथ करना चाहिए
सफेद लट-
यह मक्के की जड़ों को अधिक नुकसान पहुंचता है
इसके नियंत्रण के लिए कार्बोफ्युरान 3G forait 4g ki 20-25 किलोग्राम पर हैक्टयर बुआय करे
तना छेदक स्टेम बोरर-
मक्का का प्रमुख हानिकारक कीट है
इसकी लारवा अवस्था सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है यह कीट मक्के के पौधे 1 महीने की अवस्था में हो जाने पर नुकसान पहुंचाना शुरू करते हैं
ज्वार फसल के अनुसार रोकथाम करना चाहिए
उपज-
संकर मक्का- 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है
संकुल मक्का- 30 से 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है


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